मंदिर का इतिहास हिंदी में

इवेंट अपडेट

धर्म भूमि कर्णावती, वर्तमान अहमदाबाद शहर के हर क्षेत्र में हिंदू धर्म के अनेक छोटे-बड़े और सुंदर मंदिर हैं, जिनमें कई प्राचीन मंदिर, कई बड़े मंदिर और कई ऐसे मंदिर हैं जो हमारी आने वाली पीढ़ी और बच्चों को धर्म के स्वरूप से परिचित कराने, हमारी भारतीय संस्कृति और परंपराओं को मजबूत करने और देशभक्ति और राष्ट्रवाद की परिभाषा से नई पीढ़ी का निर्माण करने का काम कर रहे हैं। कुछ मंदिरों में वर्तमान आधुनिक युग में संस्कृत विद्यालय भी संचालित हो रहे हैं, जो सनातन हिंदू धर्म के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण कार्य कहा जा सकता है। ऐसा प्राचीन मंदिर, जो पिछले 500 वर्षों से निरंतर भक्तों को हिंदू सनातन धर्म से परिचित कराने और भक्तों के हृदय में आस्था, भक्ति और श्रद्धा की ज्योति जलाने का सुंदर कार्य कर रहा है, इसके साथ ही दैनिक गौ सेवा, मानव सेवा और अन्य धार्मिक गतिविधियों के माध्यम से इस भूमि को एक पावन भूमि में परिवर्तित करने का सुंदर कार्य कर रहा है, यह वास्तव में सर्वोत्तम कार्य है जो हमारी शिक्षा प्रणाली नहीं कर पाई है। ऐसे समृद्ध राष्ट्रवादी युवा कोष के निर्माण का कार्य किया जा रहा है, जिसके लिए कर्तव्यनिष्ठ हिन्दू धर्म के मूल्यों को उत्कृष्टता के साथ गौरवान्वित करने वाले युवा भारतीयों की नई पीढ़ी के निर्माण की सेवा इस मंदिर के पूर्व दिवंगत संतों, शिरोमणियों तथा वर्तमान महंतों, साधुओं और सेवकों द्वारा निरंतर की जा रही है।

श्री रामधाम मंदिर

श्री बाबा रामदेव देवस्थान ट्रस्ट
धर्म भूमि कर्णावती वर्तमान अहमदाबाद शहर के हर क्षेत्र में हिन्दू धर्म के अनेक छोटे-बड़े और सुन्दर मंदिर हैं, जिनमें कई प्राचीन मंदिर हैं, कई बड़े मंदिर हैं और कई ऐसे मंदिर हैं जो हमारी भावी पीढ़ी और बच्चों को धर्म के स्वरूप से परिचित करा रहे हैं, हमारी भारतीय संस्कृति और परंपराओं को सुदृढ़ कर रहे हैं, तथा देशभक्ति और राष्ट्रवाद की परिभाषा से नई पीढ़ी का निर्माण कर रहे हैं। कुछ मंदिरों में वर्तमान आधुनिक युग में संस्कृत विद्यालय भी कार्यरत हैं, जो सनातन हिन्दू धर्म के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण कार्य कहा जा सकता है।

ऐसा प्राचीन मंदिर, जो 500 वर्षों से निरंतर भक्तों को हिंदू सनातन धर्म से परिचित कराने तथा भक्तों के हृदय कमलों में आस्था, श्रद्धा और भक्ति की ज्योति प्रज्वलित करने का सुंदर दैनिक कार्य कर रहे है, साथ ही दैनिक गौ सेवा, मानव सेवा तथा अन्य धार्मिक गतिविधियों के माध्यम से इस धरा को तपोभूमि में परिवर्तित करने का सुंदर कार्य कर रहे है, यह एक सही मायने मे सर्वोतम कार्य है जिसे हमारी शिक्षा पद्धति नहीं कर पाई है ऐसे समृद्ध राष्ट्रवादी युवा धन का निर्माण करने का कार्य हो रहा है , जिसके लिए इस मंदिर के पूर्व स्वर्गीय संतों, शिरोमणियों तथा वर्तमान महंतों, साधुओं और सेवकों द्वारा हुई कर्मनिष्ठा कर्तव्यपरायण हिन्दू धर्म के मूल्यों को श्रेष्ठता से गौरवविंत करती हुई नई युवा भारतीय की पीढ़ी का निर्माण करने की सेवा निरंतर की जा रही है।

पश्चिम अहमदाबाद में थलतेज टेकरा, दूरदर्शन चौराहा रोड पर तथा साल अस्पताल के सामने, बाबा रामदेव संस्थान ट्रस्ट द्वारा संचालित मंदिर में, लगभग 500 वर्ष पूर्व रामदेव बाबा के भक्तों द्वारा एक छोटा सा मंदिर बनाया गया था। यहां पहले एक सरोवर था। किनारे पर बबूल नीम पीपल और वट के वृक्ष से हरा भरा जंगल था सरोवर के एक तरफ में एक छोटी सी पहाड़ी पर, ग्वाले गाय, बकरियां आदि चराने आते थे और जब राजस्थान संत बाबा रामदेव पीर जीवित थे, तब वे अपनी तीर्थयात्रा के दौरान झील के किनारे विश्राम करने के लिए यहां रुके थे। लोककथा के अनुसार, यह थलतेज गांव के बुजुर्गों से पता चला है उसके कुछ साल बाद,

एक संत ने रामदेव पीर के विश्राम स्थल पर यहां रामदेव पीर की देरी यानि छोटा मंदिर बनाया और सेवा पूजा करते हुए वहां रहना शुरू कर दिया। कई गरीब पशुपालक जो गायों की सेवा भी करते थे, अपनी गायों को इस देरी के पास कुआ था इसी लिए अगल बगल के पेड़ के निचे अपना गौ भैंस बकरिया बगैरा चराने की बाद बांध कर छोड़ देते दूसरे दिन फिर उसे जंगल मे चरवाने को ले जाते थे और सुबहमे चरवाह ग्वालिया गायों को चराने ले जाते। धीरे-धीरे, गौ सेवा यज्ञ की शुरुआत वही रामदेव जी मंदिर के संत द्वारा शुरू की गईं , यह संत बीमार गायों या दूध न देने वाली गायों की सेवा करते थे। इसलिए, भक्तों ने सेवा यज्ञ में रामदेव पीर, भगवान श्री राम और हनुमानजी के मंदिर बनाने के लिए धन दान किया और झील के किनारे एक मंदिर और पहाड़ी के पास एक कुआं भी बैठने रहने विश्राम करने की सुविधा से बनाया।

अब वही स्थान पर तीर्थयात्री और लोग उस कुएँ के किनारे पानी पीकर विश्राम करते थे। लेकिन पहले यह स्थान लगभग 30 वर्ष पूर्व तक केवल चरागाह था। फिर शहर के विकास के बाद देरी में श्री बाबा रामदेव देवस्थान ट्रस्ट द्वारा एक विशाल मंदिर का निर्माण कराया गया और अब इस स्थान पर गौ सेवा परम धर्म की निरन्तरता के अनुरूप बाबा रामदेव पीर, जगत जननी माँ अम्बा जी, पंचमुखी हनुमानजी के साथ-साथ शनिदेव और बटुक भैरव का मंदिर है।
(1) इस मंदिर में घोड़े पर बैठे बाबा रामदेव पीर की मूर्ति संगमरमर से बनी है और बाबा रामदेव पीर का मुस्कुराता हुआ चेहरा काफ़ी दर्शनीय मूर्ति दर्शन मूर्ति साढ़े चार फीट ऊँची एक सुंदर मूर्ति है।
(2) बाबा रामदेव पीर के मंदिर के बगल में एक अन्य मंदिर में जगत जननी माँ अम्बा जी की प्रसन्न और मुस्कुराते हुए चेहरे वाली एक सुंदर मूर्ति है। जगत जननी माँ अम्बा जी की सुन्दर श्रृंगार युक्त मूर्ति के दर्शन हेतु भक्तजन अवश्य आते हैं।
(3) पंचमुखी हनुमान जी की एक अन्य सुन्दर पाषाण मूर्ति की पूजा प्रत्येक शनिवार और मंगलवार को पाँच हज़ार से अधिक भक्त करते हैं।
(4) यहाँ इस मंदिर के साथ ही भगवान शनिदेव की साढ़े पाँच फुट ऊँची सुन्दर काले पत्थर की मुखाकृति वाली मूर्ति भी स्थापित है। भगवान शनिदेव की पवित्र शिला के साथ पीतल की एक छोटी मूर्ति और एक पत्थर भी पूजा के लिए रखा हुआ है। शनिवार की रात्रि में भक्तगण इस मंदिर में पंक्ति में खड़े होकर विधिवत दर्शन करते हैं। शनिवार के दिन हज़ारों भक्त नियमित रूप से भगवान शनिदेव को अर्क माला, सरसो का तेल, वस्त्र और काले उड़द आदि चढ़ाते हैं और भगवान शनिदेव का शुभ आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। भगवान शनिदेव भी भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूरी करते हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं। साथ ही, भगवान शनिदेव की पीड़ा या अन्य दशाओं से पीड़ित भक्तगण भी शनिवार के दिन गौ सेवा के लिए दान देकर मंदिर की गौ सेवा में सहयोग करते हैं क्योंकि कुछ दिनों पर भक्तगण गाय को हरी घास अर्पित करते हैं। वे इतना अधिक अर्पित करते हैं कि गाय निश्चित अंतराल पर भोजन ग्रहण करने और अपनी क्षमता के अनुसार उसे चबाने के बाद, कुछ घंटों के बाद ही पुनः भोजन ग्रहण करती है। चूँकि यह क्रम मंदिर के गौ सेवकों द्वारा बहुत ही सुन्दर ढंग से आयोजित किया जाता है, इसलिए आप सभी भक्तों द्वारा गौ सेवा हेतु गौ धन का दान अधिक उत्तम एवं उपयुक्त माना जाता है। इसलिए, भक्तों की सुविधा के लिए, मंदिर ट्रस्ट की गौशाला में डिजिटल दान करने हेतु क्यूआर कोड की सुविधा भी उपलब्ध है। यहाँ, यह मंदिर ट्रस्ट अपनी प्राचीन परंपरा के अनुसार गौ सेवा, गौ माता और बछड़े को हरी सूखी घास, पौष्टिक आहार और अन्य आहार प्रदान करता है, साथ ही गाय और उसके बछड़ों की नियमित चिकित्सा जाँच और दवाइयाँ भी उपलब्ध कराता है। इस प्रकार, बाबा रामदेव ट्रस्ट अपने प्राचीन मंदिर की गौ सेवा की प्राचीन परंपरा की निरंतरता को बनाए रखते हुए नियमित रूप से सम्पूर्ण गौ सेवा करता है ताकि भक्त भी अपने रिश्तेदारों के जन्मदिन, द्वादशी, पूर्णिमा, अमावस्या, शनिवार, गुरुवार और अपनी संतान की सफलता के अवसर पर गौ सेवा हेतु इस मंदिर में श्रद्धापूर्वक आते हैं। और व्यापारी भी गौ सेवा में एक निश्चित राशि दान करके अपने व्यापार में सफलता के साथ पुण्य कर्म करते हैं।

साथ ही, श्री बाबा रामदेव देवस्थान ट्रस्ट के दूसरी ओर, भगवान श्री रामधाम मंदिर की एक अति प्राचीन मूर्ति और हनुमानजी की स्वयं निर्मित पाषाण मूर्ति भी विराजमान है। साथ ही, इस श्री रामधाम मंदिर परिसर में एक सुंदर शिव मंदिर भी स्थित है और भक्तों की आस्था के लिए साईं धाम श्रद्धा मंदिर में साईं बाबा की एक मूर्ति भी विराजमान है

(1) श्री राम धाम मूर्ति दर्शन में भगवान श्री राम की उनके भाई लक्ष्मण जी और माता जानकी सीता माता के साथ 4 फुट ऊँची खड़ी प्रतिभास्पन्न श्वेत संगेमरमर की मूर्ति दर्शन है साथ ही हनुमान जी की एक छोटी मूर्ति भी है।

(2) श्री राम भक्त हनुमान जी महाराज की एक सुंदर और चमत्कारी पत्थर की स्वयंभु मूर्ति भी दर्शनीय है। यहाँ वर्षों से साधु-संतों और ब्राह्मणों द्वारा प्रातःकाल से रात्रि के अंतिम प्रहर तक रामायण के श्लोकों का पाठ किया जाता है।

(3) इसके अलावा इसी मंदिर के शिवालय में एक फुट ऊँचा नर्मदेश्वर शिवलिंग भी भक्तों का अत्यंत प्रिय और पूजनीय शिवलिंग है।

इस शिवलिंग की नियमित पूजा-अर्चना और पूर्ण आस्था के साथ आराधना करने वाले अनेक भक्तों को शिवलिंग में ध्यानमग्न महादेव के दर्शन हुए हैं। यहाँ शिव मंदिर में शिव महापुराण का निरंतर पाठ होता रहता है। इसीलिए संतों की धार्मिक शिक्षाओं का पाठ और यज्ञ, होम, हवन, सुंदरकांड का पाठ, भजन, कीर्तन की ध्वनि इस मंदिर को एक तपोभूमि में परिवर्तित हो गईं है क्योंकि निरंतर यह यज्ञ हवन और धर्म ग्रंथो और शास्त्र के पठन कार्य से यह भूमि पवित्र पुण्यभूमि और तपो भूमि मे परिवर्तित हो गई है और भगवान की आस्था, विश्वास और संस्कृति के वाहक संतों के आगमन से पावन भूमि है
श्री राम धाम मंदिर मे जिस भक्त का आगमन होता है वंहा भक्तो को चरणस्पर्श से चितशांति प्राप्त होती है और भक्त के ह्रदयकमल मे चिदानंद स्वरूप आत्म जागृति प्रदान होती है , जिससे यह पावन स्थल और भी पवित्र हो जाता है और भक्तों को चरण स्पर्श मात्र से ही शांति का सुखद और आनंदमय अनुभव प्राप्त होता है।इसी लिए कई भक्त रोजाना दौड़ भाग की जिंदगी से शांति प्राप्ति हेतु यंहा मंदिर मे प्रभु की मूर्ति के संमुख 15 या 30 मिनिट कुछ पल के लिए ध्यान मुद्रा मे मंदिर की संगेमरमर की फर्श पर ध्यान मे लीन हो जाते है यही तो जीवन के परमसूख और आत्मा को चिदानंद की अनुभूति प्राप्ति होती है.

(4) शिव मंदिर के पास भगवान कृष्ण और राधा जी की सुंदर और मनमोहक चार फुट की संगमरमर की मूर्ति के दर्शन करके भक्तगण अपने दैनिक कार्य की शुरुआत करते हैं। यदि आप इस सुंदर और मनमोहक मुस्कुराती हुई मूर्ति को एक बार दर्शन कर लेते हैं, तो आप बार-बार दर्शन करने आएंगे जो आपके मन में बस जाएगा।
यही तो श्री कृष्ण के लिए मीराबाई ने भजन की रचना मे भी कहा था ” मेरा प्यारा कान्हा मनमोहक है चितचोर है ” राधा कृष्ण की इस सुंदर मूर्ति के दर्शन करने के बाद लगभग हर भक्त धन्यता और प्रसन्नता महसूस करता है। और अन्य परिवार को भी मूर्ति दर्शन करने के लिए साथ मे ले आते है.

(5) कुछ भक्तों की दृढ़ आस्था के कारण, यहाँ 1994 से साईं बाबा की एक सुंदर प्रतिमा स्थापित है। यह प्रतिमा 6 फीट ऊँची है और सफेद संगमरमर से बनी है। यह प्रतिमा भक्तों को आनंद और आशीर्वाद से परिपूर्ण करती है। हर गुरुवार को हजारों भक्त साईं बाबा की प्रतिमा के दर्शन हेतु आते हैं।

गुरुवार को दान-पुण्य के उद्देश्य से, भक्त वर्षों से मंदिर के माध्यम से गरीबों को भोजन कराते आ रहे हैं और पुण्य अर्जित कर, अपने और अपने परिवार के व्यवसाय और दैनिक जीवन में सुख, समृद्धि, यश और कीर्ति में वृद्धि कर रहे हैं।
इस प्रकार, प्राचीन काल से लेकर वर्तमान युग तक, बाबा रामदेव ट्रस्ट और श्री रामधाम मंदिर, साईं धाम मंदिर थलतेज अहमदाबाद न केवल अपनी भक्ति और दर्शन के लिए प्रसिद्ध हैं, बल्कि अपनी जनसेवा, गौ सेवा और साईं मेडिकल सेंटर, पश्चिम अहमदाबाद जैसे अन्य प्रसिद्ध और विश्वसनीय सेवा कार्यों के लिए भी प्रसिद्ध हैं।
इसके साथ ही, हर गुरुवार को प्रसिद्ध भजन गुरु भक्ति ईश्वर भजन और भक्तिमय प्रस्तुति से भी भक्तों को आस्था के सागर में डुबो देते हैं।
और
हर शनिवार को बड़ी संख्या में हनुमानजी के भक्त सुंदर कांड का पाठ कर श्री राम भगवान और हनुमानजी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यहाँ भक्तगण अपनी संतान की पुण्यतिथि, जन्मदिवस, त्यौहार और भविष्य की उन्नति व सफलता के अवसर पर श्री रामधाम मंदिर में आस्था के साथ भजन कीर्तन का आयोजन अवश्य करते हैं। आप भी इस मंदिर में यह पुण्य कार्य कर सकते हैं।

और यह श्री बाबा रामदेव देवस्थान ट्रस्ट ने तीन बार जरूरत मंद कन्याओ के लिए समूह विवाह लग्न का गरिमा मय सुंदर आयोजन करते हुए आज तक 1000 से भी ज्यादा कन्याओ के विवाह का शुभ मंगलमय और कन्यादान सबसे बड़ा पुण्य कार्य शास्त्र मे कहा गया है यह भगीरथ कार्य केवल और केवल मानव सेवा भावना से प्रेरित है आप भी इस श्री रामधाम मंदिर जो की श्री बाबा रामदेव देवस्थान ट्रस्ट से संचालित है इसमें अपना सहयोग कार्यदान और अनुदान दे कर जीवन मे आपने और आपने समस्त परिवार के लिए पुण्य कार्य कर सकते है मंदिर ट्रस्ट मे अनुदान हेतु आप क्यूँ आर कोड से डिजिटल बैंकिंग सुविधा से अपना अनुदान दे सकते है जो आपको मंदिर ट्रस्ट की ऑफिसियल वेब साईट पोर्टल पर भी प्राप्त हो जायेगा.

ये सभी मानव सेवा, गौ सेवा और धर्म कर्म और भारतीय परम्परा संस्कृति के साथ साथ धर्म ज्ञान से सम्मिलित राष्ट्र के युवा धन को सुशिक्षित करने का अतुल्य और अमूल्य कार्य श्री बाबा रामदेव देवस्थान ट्रस्ट और श्री रामधाम मंदिर के पूर्व स्वर्गीय संत शिरोमणि वासुदेवजी महाराज और उनके अनुज गुरुवर्य संतों द्वारा किए गए नियमित यज्ञ हवन के आधार पर बनाए गए हैं। वर्तमान प्रमुख महंत, संत शिरोमणि वैष्णव सम्राट महंत श्री मोहनदासजी महाराज, इस मंदिर में नियमित यज्ञ हवन पूजन करते हैं। इस पावन भूमि में भक्तों के चरण स्पर्श की कथा, वचनामृत की कहानी, भक्तों के दिलों में भक्ति, विश्वास और अच्छे कर्मों की भावना को जागृत करती है और भक्तों को मन और हृदय की सुखद शांति और खुशी मिलती है। यह इस मंदिर के सभी दैनिक कर्मनिष्ठ और कर्तव्यनिष्ठ भक्तों का मत है।
वर्तमान संत शिरोमणि महंत श्री मोहनदासजी महाराज राम कथा और अन्य कथामृत के माध्यम से भक्तों के दिलों में ईश्वर के प्रति आस्था और विश्वासनीयता से शुद्ध सनातन हिंदू धर्म को स्थापित करते हैं। जब 26 जनवरी 2001 को गुजरात राज्य में भयंकर भूकंप आया, तो एक क्षण भी विलम्ब न करते हुए, उन्होंने तुरंत अपने मंदिर सेवकों के साथ मिलकर अपने आस-पास की सभी सोसायटियों के निवासियों को चाय, पानी, नाश्ता व अन्य अमूल्य सेवाएं प्रदान कीं, साथ ही मंदिर की रसोई में दोनों समय प्रत्येक निवासी के लिए भोजन, नाश्ता व चाय की व्यवस्था की। अन्य किसी सहायता व अनुदान के अलावा, महंत श्री मोहनदासजी महाराज ने स्वयं मंदिर ट्रस्ट के माध्यम से यह अमूल्य सेवा प्रदान की। वह भी लगातार 25 दिनों तक, भूकंप के झटकों से फ्लैटों में रहने वाले लोगों में भय व दहशत फैल गई। इसलिए, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं के सहयोग से महंत श्री के निर्देशानुसार गोयल इंटरसिटी के बगीचे में अस्थायी टेंट व बिस्तरों की भी व्यवस्था की गई। साथ ही, तब से लेकर आज तक, मंदिर की सेवा गतिविधियों के साथ-साथ, साधु समाज द्वारा वैष्णव सम्राट महंत श्री मोहनदासजी महाराजजी को महा मंडलेश्वर की उपाधि भी दी गई है । वर्तमान में संत शिरोमणि वैष्णव सम्राट महंत श्री मोहनदासजी महाराज गुजरात प्रांत के अखिल भारतीय संत समाज के अध्यक्ष हैं। हाल ही में संपन्न प्रयागराज महाकुंभ 2025 में भी उनका एक अखाड़ा था जिसमें महंत श्री मोहनदासजी महाराज की पेशवाई नियमित रूप से निकलती थी जो कुम्भ मेले मे रोज भिन्न भिन्न साधु संत के अखाड़ों की शोभायात्रा मे लाखो भक्त जन साधु संत को हार पहना कर और पुष्प वृष्टी करते हुए आदर्श के साथ आदर संम्मान प्रदान करते है और मोहनदासजी जी के अखाड़ों मे अनेक साधु संतों को ठहराने और भोजन प्रसाद की क सुविधा का आयोजन और भोजन-प्रसाद की सुंदर व्यवस्था से सभी साधु संतों ने शुभकामनायें आशीष दे कर वैष्णव सम्राट महंत श्री मोहनदासजी महाराज जी को जन सेवा निरंतर करने का आशीर्वाद भी दिया.। और निकट के भविष्य में नासिक के 2027 कुंभ मेले की गतिविधियों में भी वे अनेक कार्य कार्यक्रमों में व्यस्त हैं।

31 अक्टूबर 2026 से नासिक में शुरू होकर जुलाई 2028 में समाप्त होने वाला कुंभ मेला पहली बार लगातार 21 महीनों तक नासिक में आयोजित होने जा रहा है।

श्री बाबा रामदेव देवस्थान ट्रस्ट

शिरोमणि महंत श्री मोहनदासजी महाराज

वर्तमान संत शिरोमणि महंत श्री मोहनदासजी महाराज रामकथा और अन्य कथाओं के माध्यम से भक्तों के हृदय में ईश्वर के प्रति आस्था और विश्वास के साथ शुद्ध सनातन हिंदू धर्म की स्थापना करते हैं। जब 26 जनवरी 2001 को गुजरात राज्य में भयानक भूकंप आया, तो बिना एक पल की देरी किए, उन्होंने तुरंत अपने मंदिर के सेवकों के साथ अपने आस-पास की सभी सोसायटियों के निवासियों को चाय, पानी, नाश्ता और अन्य अमूल्य सेवाएं प्रदान कीं, साथ ही मंदिर की रसोई में दोनों समय प्रत्येक निवासी के लिए भोजन, नाश्ता और चाय की व्यवस्था की। अन्य सहायता और अनुदान के अलावा, महंत श्री मोहनदासजी महाराज ने स्वयं मंदिर ट्रस्ट के माध्यम से यह अमूल्य सेवा प्रदान की। वह भी लगातार 25 दिनों तक, भूकंप के झटकों के कारण फ्लैटों में रहने वाले लोगों में भय और दहशत फैल गई।

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